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लाभ घटाने वाला पाँच दिशाओं का दबाव, पोर्टर के 5 बल (Porter's Five Forces)

कभी ऐसा होता है कि एक ही समय पर शुरू हुई दो कंपनियाँ लगभग बराबर मेहनत करती हैं, फिर भी एक अच्छा लाभ कमाती है और दूसरी हमेशा मुश्किल से टिक पाती है। इसकी वजह प्रबंधकों की क्षमता का अंतर हो सकता है, लेकिन कुछ उद्योगों में प्रबंधन कोई भी सँभाले, पैसा कमाना खास तौर पर कठिन होता है। विमान टिकटों की कीमतों को लेकर लगातार प्रतिस्पर्धा करने वाला विमानन उद्योग इसका प्रमुख उदाहरण है।

तो यह क्या तय करता है कि कोई उद्योग पैसा कमाने के लिए कितना अनुकूल है? हार्वर्ड बिज़नेस स्कूल के माइकल पोर्टर (Michael E. Porter) ने इस सवाल का जवाब पाँच बलों के माध्यम से दिया। किसी कंपनी के आसपास के प्रतिस्पर्धी वातावरण को पाँच दिशाओं से पड़ने वाले दबावों में बाँटकर समझने का यही ढाँचा ‘पोर्टर के 5 बल (Porter's Five Forces)’ कहलाता है।

इस सामग्री में हम क्रम से 5 बलों के उद्भव की पृष्ठभूमि, इन पाँच बलों का स्वरूप, प्रवेश बाधाओं और उद्योगों के उदाहरणों तथा इस साधन की सीमाओं और उपयोग के तरीकों को समझेंगे।

पोर्टर के 5 बल: एक ऐसी संरचना जिसमें मौजूदा प्रतिस्पर्धियों के बीच प्रतिस्पर्धा के साथ नए प्रवेशकों और स्थानापन्न उत्पादों का खतरा तथा आपूर्तिकर्ताओं और खरीदारों की सौदेबाज़ी की शक्ति उद्योग की लाभप्रदता पर दबाव डालती है। कैफ़े उद्योग के काल्पनिक उदाहरण में दूसरे कैफ़े मौजूदा प्रतिस्पर्धी हैं और घर पर पेय बनाकर पीना एक स्थानापन्न विकल्प है।
उद्योग की लाभप्रदता को समझने वाले पोर्टर के 5 बल। कैफ़े का उदाहरण समझाने के लिए दिया गया एक काल्पनिक उदाहरण है। स्रोत: हार्वर्ड बिज़नेस स्कूल · पाँच बल.

उद्योग के लाभ को निर्धारित करने वाले पाँच बल

5 बलों का ढाँचा क्यों सामने आया

सुबह की धूप से रोशन प्रबंधन विद्यालय की कक्षा में खाली लकड़ी की मेज़ें कतारों में लगी हैं और एक मेज़ पर बंद नोटबुक तथा कॉफ़ी का प्याला रखा है।

5 बलों का विचार इस सोच से शुरू हुआ कि प्रतिस्पर्धा को सामने मौजूद प्रतिद्वंद्वियों की लड़ाई से कहीं अधिक व्यापक रूप में देखना चाहिए।

(1) 1979 का लेख
पोर्टर ने 1979 में हार्वर्ड बिज़नेस रिव्यू में ‘प्रतिस्पर्धी बल रणनीति को कैसे आकार देते हैं (How Competitive Forces Shape Strategy)’ शीर्षक से लेख प्रकाशित करके पहली बार यह ढाँचा प्रस्तुत किया। अगले वर्ष प्रकाशित उनकी पुस्तक ‘प्रतिस्पर्धी रणनीति (Competitive Strategy)’ के माध्यम से यह प्रबंधन रणनीति के एक बुनियादी साधन के रूप में व्यापक रूप से प्रचलित हुआ।

(2) SWOT विश्लेषण से असंतोष
उस समय कंपनियाँ आम तौर पर SWOT विश्लेषण का इस्तेमाल करती थीं, जिसमें ताकतों, कमज़ोरियों, अवसरों और खतरों की सूची बनाई जाती है। पोर्टर का मानना था कि यह तरीका उस समय मन में आने वाली बातों को लिखने तक सीमित रह जाता है और इसलिए इसमें विश्लेषण की कठोरता का अभाव है।

(3) उद्योग की संरचना का दृष्टिकोण
5 बलों की जड़ें औद्योगिक संगठन सिद्धांत के उस दृष्टिकोण में हैं जिसके अनुसार उद्योग की संरचना कंपनियों के व्यवहार और प्रदर्शन को निर्धारित करती है। यदि सभी पाँच बल प्रबल हों, तो लाभ घटकर न्यूनतम स्तर पर पहुँच जाता है, और यदि वे कमज़ोर हों, तो औसत से अधिक लाभ की उम्मीद की जा सकती है।


पाँच बलों का स्वरूप

लकड़ी की मेज़ के बीच में रखे शतरंज के राजा को पाँच अलग-अलग मोहरों ने पाँच दिशाओं से घेर रखा है।

इन पाँच बलों को एक ही बाज़ार में टकराने वाली क्षैतिज प्रतिस्पर्धा के तीन रूपों और लेन-देन के दूसरे पक्ष के साथ होने वाली ऊर्ध्वाधर प्रतिस्पर्धा के दो रूपों में बाँटा जाता है।

  • मौजूदा प्रतिस्पर्धियों के बीच प्रतिस्पर्धा (Competitive Rivalry): बाज़ार में पहले से मौजूद कंपनियाँ कीमत घटाने, विज्ञापन और नए उत्पादों के ज़रिए जितना अधिक मुकाबला करती हैं, सभी का लाभ उतना ही कम होता है।
  • नए प्रवेशकों का खतरा (Threat of New Entrants): यदि नई कंपनियाँ आसानी से प्रवेश कर सकती हों, तो मौजूदा कंपनियाँ मनमाने ढंग से कीमतें नहीं बढ़ा सकतीं।
  • स्थानापन्न उत्पादों का खतरा (Threat of Substitutes): ये ऐसे उत्पाद हैं जो किसी दूसरी विधि से उसी आवश्यकता को पूरा करते हैं। कोला के लिए नल का पानी एक स्थानापन्न उत्पाद है, लेकिन उसी विधि से बना दूसरे ब्रांड का कोला स्थानापन्न उत्पाद नहीं, बल्कि प्रतिस्पर्धी है।
  • खरीदारों की सौदेबाज़ी की शक्ति (Bargaining Power of Buyers): ग्राहकों के पास जितने अधिक विकल्प हों और विकल्प बदलना जितना आसान हो, कीमत घटाने का दबाव उतना ही बढ़ता है।
  • आपूर्तिकर्ताओं की सौदेबाज़ी की शक्ति (Bargaining Power of Suppliers): यदि किसी स्नैक बनाने वाली कंपनी को आटा बेचने वाला केवल एक ही आपूर्तिकर्ता हो, तो कंपनी को उसकी माँगी हुई कीमत स्वीकार करनी ही पड़ती है।

प्रवेश बाधाएँ और उद्योगों के उदाहरण

सूर्यास्त के समय हवाई अड्डे के टर्मिनल की खिड़की के पार बिना किसी चिह्न वाले कई सफ़ेद यात्री विमान बोर्डिंग गेटों पर कतार में खड़े हैं।

इन पाँच बलों में से नए प्रवेशकों के खतरे को रोकने का काम प्रवेश बाधाएँ करती हैं। बाधाएँ जितनी ऊँची हों, मौजूदा कंपनियों के लिए अपना लाभ बनाए रखना उतना ही आसान होता है।

(1) प्रवेश बाधाएँ बनाने वाले तत्व
इसके प्रमुख उदाहरण हैं पैमाने की अर्थव्यवस्थाएँ, जिनमें अधिक उत्पादन करने पर प्रति इकाई लागत घटती है; नेटवर्क प्रभाव, जिसमें उपयोगकर्ताओं की संख्या बढ़ने के साथ मूल्य बढ़ता है; और बदलाव की लागत, जो एयरलाइन के माइलेज अंकों की तरह किसी दूसरे विकल्प पर जाना कठिन बना देती है। इसके अलावा बड़ी शुरुआती पूँजी, वितरण माध्यमों तक पहुँच बनाने की कठिनाई तथा पेटेंट या लाइसेंस जैसी सरकारी नीतियाँ भी बाधाएँ बनती हैं।

(2) विमानन उद्योग में कठिनाइयों की वजह
एयरलाइनों को विमानों और हवाई अड्डे की सुविधाओं पर भारी स्थिर लागत उठानी पड़ती है, जबकि एक अतिरिक्त यात्री को ले जाने की लागत कम होती है। खाली सीटें भरने के लिए कीमतें घटाने की होड़ आसानी से शुरू हो जाती है, और यात्री केवल कीमतों की तुलना करके टिकट खरीदते हैं, जिससे पूरे उद्योग की लाभप्रदता कम हो जाती है।

(3) केवल विकास दर देखने का जाल
तेज़ी से बढ़ता उद्योग आकर्षक दिखता है, लेकिन प्रवेश बाधाएँ कम हों, तो नई कंपनियाँ बड़ी संख्या में आ जाती हैं। 1990 के दशक में वीडियो किराये के बाज़ार का नेतृत्व करने वाली ब्लॉकबस्टर केवल अपनी वृद्धि पर ध्यान देती रही और अंततः उसे 1998 में सामने आई नई प्रतिस्पर्धी नेटफ्लिक्स के लिए अपनी जगह छोड़नी पड़ी।


5 बलों की सीमाएँ और उपयोग के तरीके

एक साफ़ मेज़ पर लैपटॉप, कार की चाबी और ईंधन का छोटा कनस्तर साथ रखे हैं, जो ऐसे पूरक उत्पादों की याद दिलाते हैं जिनका मूल्य साथ इस्तेमाल करने पर बढ़ता है।

5 बलों का आज भी व्यापक उपयोग होता है, लेकिन इसे हर समस्या की कुंजी मानना उचित नहीं है।

(1) छठा बल, पूरक उत्पाद
1990 के दशक के मध्य में हार्वर्ड बिज़नेस स्कूल के ऐडम ब्रैंडनबर्गर (Adam Brandenburger) और येल विश्वविद्यालय के बैरी नेलबफ़ (Barry Nalebuff) ने खेल सिद्धांत के आधार पर तर्क दिया कि साथ इस्तेमाल करने पर मूल्य बढ़ाने वाले पूरक उत्पाद बनाने वाली कंपनियों के प्रभाव को अलग से देखना चाहिए। कंप्यूटर और सॉफ़्टवेयर तथा कार और ईंधन के संबंध इसके उदाहरण हैं। पोर्टर पूरक उत्पादों, सरकार और तकनीकी नवाचार को स्वतंत्र बलों के बजाय पाँच बलों को प्रभावित करने वाले कारक मानते थे।

(2) आलोचना के स्वर
इस ढाँचे की आलोचना इस आधार पर की जाती है कि यह मानकर चलता है कि खरीदार, आपूर्तिकर्ता और प्रतिस्पर्धी आपस में गठजोड़ नहीं करते तथा बाज़ार में अनिश्चितता कम होती है। यह यह भी बताता है कि खतरा बड़ा है, लेकिन ऐसी स्थिति में क्या करना चाहिए, यह नहीं बताता।

(3) सही उपयोग का तरीका
पोर्टर ने ज़ोर दिया कि विश्लेषण की इकाई किसी व्यापक उद्योग समूह के बजाय वह विशिष्ट बाज़ार होना चाहिए जहाँ समान उत्पाद वास्तव में बेचे जाते हैं। एक ही उद्योग के भीतर भी कंपनी की क्षमताओं के अनुसार लाभ बदलता है, इसलिए इसे मूल्य शृंखला विश्लेषण या कंपनी के आंतरिक संसाधनों के विश्लेषण के साथ इस्तेमाल करना बेहतर है।


5 बलों से मिलने वाली सबसे बड़ी सीख यह है कि प्रतिस्पर्धी केवल दिखाई देने वाले प्रतिद्वंद्वी ही नहीं होते। ग्राहक, आपूर्तिकर्ता, अभी तक बाज़ार में प्रवेश न करने वाली कंपनियाँ और बिल्कुल अलग रूप वाले स्थानापन्न उत्पाद भी हमारे हिस्से के लाभ के लिए ज़ोर आज़मा रहे होते हैं।

पूरे प्रतिस्पर्धी परिदृश्य में काम कर रहे बलों को समझना ही ऐसी स्थिति खोजने वाली प्रबंधन रणनीति का पहला कदम है जहाँ जीत संभव हो।

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