इस बार हम उत्पाद जीवन चक्र पर सामग्री प्रस्तुत करना चाहते हैं, जिसका अर्थ है किसी उत्पाद के बाज़ार में आने से लेकर उसकी वृद्धि और गिरावट तक का जीवन चक्र। इसकी अच्छी समझ से कंपनियों को विपणन रणनीति बनाने, जोखिम प्रबंधन करने और बाज़ार के अनुसार लचीले ढंग से प्रतिक्रिया देने में मदद मिल सकती है।
उत्पाद जीवन चक्र क्या है?
उत्पाद जीवन चक्र का ग्राफ़
उत्पाद जीवन चक्र (Product Life Cycle, PLC) को सामान्यतः 4 चरणों में बाँटा जाता है: परिचय, वृद्धि, परिपक्वता और गिरावट। प्रत्येक चरण में विपणन रणनीति, लाभ और बिक्री की मात्रा आदि बदलते हैं।
ऊपर दिए गए ग्राफ़ से स्पष्ट है कि उत्पाद के बाज़ार में आने के शुरुआती दौर में वृद्धि धीमी रहती है या घाटा होता है। फिर बाज़ार में उसकी पहचान बनने और वृद्धि तथा परिपक्वता के चरणों से गुज़रने के साथ बिक्री से होने वाली आय और लाभ काफ़ी बढ़ते हैं। इसके बाद इनमें धीरे-धीरे गिरावट का चरण आता है।
अब हम क्रम से उन चरणों की विशेषताओं को एक-एक करके समझेंगे, जिनसे प्रत्येक उत्पाद गुज़रता है।
परिचय चरण
उत्पाद का विकास पूरा होने के बाद बाज़ार में प्रवेश करने का समय
परिचय चरण तब शुरू होता है जब कोई कंपनी अपना नया उत्पाद पहली बार बाज़ार में उतारती है। उत्पाद की पहचान बनने और बाज़ार में जगह बनाने के लिए कुछ समय चाहिए होता है, और धीरे-धीरे बिक्री की मात्रा बढ़ने लगती है।
इस चरण में उत्पाद की पहचान कम होने के कारण उसकी बिक्री दर कम रहती है। वितरण और प्रचार की ऊँची लागत के कारण कंपनी घाटे में रहती है या उसका शुद्ध लाभ बहुत कम होता है।
ऐसे शुरुआती चरण में प्रतिस्पर्धी कम होते हैं। इसलिए ऐसी विपणन रणनीति की आवश्यकता होती है जो उत्पाद की पोज़िशनिंग और लक्षित ग्राहकों को स्पष्ट करे तथा उसकी विशेषताओं और फ़ायदों पर ज़ोर दे।
वृद्धि चरण
वृद्धि चरण, जिसमें उत्पाद की पहचान बनती है और बिक्री से होने वाली आय तेज़ी से बढ़ती है
जब उत्पाद को बाज़ार में स्वीकृति मिल जाती है, तो वह परिचय चरण से निकलकर वृद्धि चरण में प्रवेश करता है। इस समय से बिक्री से होने वाली आय तेज़ी से बढ़ने लगती है। उत्पाद को शुरुआती दौर में अपनाने वाले ग्राहक उसे खरीदते रहते हैं और फिर आम उपभोक्ता भी उसे खरीदना शुरू कर देते हैं।
इस दौरान यदि लोगों के बीच उत्पाद की अच्छी चर्चा होती है, तो वृद्धि और भी स्पष्ट दिखाई देती है। कंपनी को लाभ कमाते देखकर प्रतिस्पर्धी भी बाज़ार में आने लगते हैं। प्रतिस्पर्धी कंपनियाँ भी अपनी अलग पहचान बनाने की रणनीतियों के साथ प्रतिस्पर्धा में उतरती हैं, जिससे बाज़ार और बड़ा होने लगता है।
इस समय कंपनी को प्रतिस्पर्धा में बढ़त हासिल करने के लिए उत्पाद में सुधार और विविधता लाने का प्रयास करना चाहिए। प्रतिस्पर्धी कंपनियों के साथ कीमतों की होड़ शुरू होने से उत्पाद की मूल्य निर्धारण रणनीति भी महत्वपूर्ण हो जाती है।
यह लाभ होने के कारण कीमतें बढ़ाने का समय नहीं है। इसके विपरीत, यह कीमतें घटाने का समय है, ताकि उपभोक्ता अधिक उत्पाद खरीद सकें।
परिपक्वता चरण
बाज़ार के अपने चरम पर पहुँचने का समय
परिपक्वता चरण में उत्पाद की बिक्री से होने वाली आय की वृद्धि धीमी पड़ जाती है या रुक जाती है। यह चरण आम तौर पर वृद्धि चरण से अधिक समय तक चलता है। बाज़ार अतिसंतृप्त हो चुका होता है, प्रतिस्पर्धी कंपनियों के साथ प्रतिस्पर्धा बहुत तीव्र हो जाती है और अलग पहचान बनाना भी कठिन हो जाता है।
प्रतिस्पर्धी कंपनियाँ भी कीमतों में छूट, बिक्री संवर्धन और उत्पाद विकास पर अपना बजट बढ़ाती हैं, इसलिए कंपनी का लाभ धीरे-धीरे घटने लगता है। जो प्रतिस्पर्धी बाज़ार में अपनी जगह नहीं बना पाए हैं, वे धीरे-धीरे बाहर होने लगते हैं और केवल मज़बूती से स्थापित प्रतिस्पर्धी ही टिके रहते हैं।
कंपनी को अपने ब्रांड के प्रति उपभोक्ताओं की निष्ठा बढ़ाने का प्रयास करना चाहिए और दोबारा खरीद को प्रोत्साहित करने वाली विपणन रणनीति बनानी चाहिए।
यह वह समय भी है जब कंपनी को तीव्र प्रतिस्पर्धा का सामना करने के लिए उत्पाद में विविधता और सुधार लाकर अपनी बाज़ार हिस्सेदारी को यथासंभव बनाए रखने का प्रयास करना चाहिए।
गिरावट चरण
बिक्री से होने वाली आय और लाभ में गिरावट तथा प्रतिस्पर्धी कंपनियों के भी संकट का सामना करने का समय
गिरावट चरण वह समय है जब उत्पाद की बिक्री से होने वाली आय धीरे-धीरे या तेज़ी से घटने लगती है। उत्पाद की विशेषताओं के अनुसार यह कमी धीमी भी हो सकती है और बहुत तेज़ भी।
अधिकांश उत्पाद परिपक्वता चरण से गुज़रने के बाद गिरावट चरण में पहुँचते हैं। इसके कई कारण होते हैं, जैसे तकनीकी प्रगति, उपभोक्ताओं की पसंद में बदलाव और प्रतिस्पर्धी कंपनियों के साथ बढ़ती प्रतिस्पर्धा।
बिक्री से होने वाली आय घटने के कारण लागत कम करने के लिए विपणन और अनुसंधान एवं विकास (R&D) के बजट में कटौती की जाती है। उत्पादों की संख्या न्यूनतम की जाती है और कभी-कभी कीमतें भी और घटाई जाती हैं।
प्रतिस्पर्धी कंपनियों के सामने भी यही स्थिति होती है। यह वह समय है जब कंपनी को तय करना होता है कि गिरावट के चरण में पहुँच चुके उत्पाद को बनाए रखा जाए, छोड़ दिया जाए या उसकी दोबारा पोज़िशनिंग करके उसे फिर से सक्रिय करने का प्रयास किया जाए।
उत्पाद जीवन चक्र की विशेषताओं और रणनीतियों का सार
उत्पाद जीवन चक्र की विशेषताएँ और रणनीतियाँ
इस सामग्री में प्रस्तुत बातों को एक नज़र में समझने के लिए उत्पाद जीवन चक्र की विशेषताओं और विपणन रणनीतियों को ऊपर दिए गए चित्र में संक्षेप में व्यवस्थित किया गया है।
उत्पाद के बाज़ार में आने के शुरुआती दौर में पहचान की कमी के कारण बिक्री कम रहती है और संकट का सामना करना पड़ता है। लेकिन जब उत्पाद अपनी विशिष्टता के बल पर बाज़ार में जगह बनाने लगता है, तो वह वृद्धि चरण में प्रवेश करता है और अच्छा लाभ कमाने का अवसर मिलता है।
लेकिन समाज में जब कोई लाभ कमाता है, तो उसकी तरह काम करके लाभ उठाने की कोशिश करने वाली प्रतिस्पर्धी कंपनियाँ भी उभरती ही हैं। बिक्री की मात्रा और लाभ जितना बढ़ते हैं, प्रतिस्पर्धी कंपनियों की संख्या भी उतनी बढ़ती है और बाज़ार संतृप्त होने लगता है। तकनीक तथा रुझानों में बदलाव जैसे कारणों से उत्पाद धीरे-धीरे गिरावट चरण में प्रवेश कर जाता है।
इस प्रकार हमने उत्पाद जीवन चक्र के बारे में जाना, जिसके माध्यम से उत्पाद के बाज़ार में आने से लेकर उसकी गिरावट तक के चरणों को समझा जा सकता है। उत्पाद जीवन चक्र का प्रबंधन कंपनियों को प्रत्येक चरण में प्रभावी रणनीतियाँ बनाने और बाज़ार के बदलावों के अनुसार ढलने में सक्षम बनाता है।
यह उन विषयों में से एक भी है जिनकी जानकारी कंपनियों को बाज़ार में सफलतापूर्वक प्रतिस्पर्धा करने और आगे बढ़ने के लिए होनी चाहिए। हमें आशा है कि इस सामग्री से आपको उत्पाद के विपणन की प्रक्रिया को और बेहतर समझने का अवसर मिला होगा।