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सवाल पूछने का डर, पुस्तकालय संबंधी चिंता (Library Anxiety)

किसी असाइनमेंट के लिए पहली बार विश्वविद्यालय के पुस्तकालय में जाने का दिन याद करें, तो बहुतों को याद आएगा कि ऊँची अलमारियों, अनजाने कॉल नंबरों और चुपचाप बैठे लोगों के बीच वे देर तक भटकते रहे, समझ नहीं पा रहे थे कि कहाँ जाएँ। सूचना डेस्क पर बैठे पुस्तकालयाध्यक्ष से पूछने पर बात तुरंत सुलझ सकती थी, फिर भी शायद आपको लगा हो कि आपका सवाल बेवकूफ़ी भरा लगेगा, इसलिए आप बस मोबाइल पर खोजकर लौट गए हों। ऐसी असहायता और डर केवल आपके व्यक्तित्व की वजह से नहीं होते, बल्कि यह ‘पुस्तकालय संबंधी चिंता (Library Anxiety)’ नाम की एक परिघटना है, जिस पर पुस्तकालय एवं सूचना विज्ञान में लंबे समय से शोध होता आया है।

सरल शब्दों में, पुस्तकालय संबंधी चिंता का अर्थ है ‘पुस्तकालय में सामग्री खोजने और उसका उपयोग करने की ज़रूरत पड़ने पर महसूस होने वाली असहजता, चिंता और डर, तथा इनके कारण मदद माँग न पाना और उससे बचने लगना’। यह चिंता पुस्तकालय का उपयोग करने की क्षमता कम होने से ज़्यादा इस डर से बढ़ती है कि कहीं अपनी कमी उजागर न हो जाए, इसलिए उसे छिपाना चाहिए।

इस सामग्री में हम क्रम से उस शुरुआती शोध को देखेंगे जिसमें पुस्तकालय संबंधी चिंता की अवधारणा सामने आई, इसे मापने वाले पाँच कारकों, पढ़ाई और शोध पर इसके प्रभावों तथा उपयोगकर्ताओं और पुस्तकालयों के मिलकर इसे कम करने के तरीकों पर चर्चा करेंगे।


पुस्तकालय के सामने खुद को छोटा महसूस करना

पुस्तकालय संबंधी चिंता का पता कैसे चला?

1980 के दशक में अमेरिका के एक विश्वविद्यालय की कक्षा का दृश्य, जहाँ नए विद्यार्थी लकड़ी की मेज़ों पर बैठकर कॉपियों में हाथ से लिख रहे हैं और सामने अध्यापक की मेज़ पर हस्तलिखित असाइनमेंट का ढेर लगा है

पुस्तकालय संबंधी चिंता की अवधारणा को पहली बार सैद्धांतिक रूप अमेरिका की पुस्तकालयाध्यक्ष और शोधकर्ता कॉन्स्टेंस मेलन (Constance A. Mellon) के उस शोधपत्र में मिला, जो 1986 में ‘कॉलेज एंड रिसर्च लाइब्रेरीज़ (College & Research Libraries)’ नामक अकादमिक पत्रिका में प्रकाशित हुआ था।

(1) विद्यार्थियों के लेखन में मिली समानताएँ
मेलन ने दक्षिणी अमेरिका के एक विश्वविद्यालय में 2 वर्षों तक प्रथम वर्ष की लेखन कक्षा के विद्यार्थियों के व्यक्तिगत लेख एकत्र किए और उनमें बार-बार उभरने वाले विषयों का विश्लेषण किया। परिणामस्वरूप, 75~85% विद्यार्थियों ने पुस्तकालय में पहली बार सामग्री खोजने के अनुभव को ‘डर’ शब्द से व्यक्त किया।

(2) मन में चलने वाले तीन तरह के विचार
विद्यार्थियों के लेखन में तीन विचार बार-बार सामने आए।

  • तुलना (Comparison): लगता है कि दूसरे विद्यार्थी पुस्तकालय का अच्छी तरह उपयोग कर लेते हैं, केवल मैं ही नहीं कर पाता।
  • शर्म (Shame): लगता है कि इस तरह अनाड़ी होना शर्म की बात है, इसलिए इसे छिपाना चाहिए।
  • बचाव (Avoidance): सवाल पूछने से अपना अनाड़ीपन सामने आ जाएगा, इसलिए बिना पूछे अकेले ही जूझते रहते हैं।

मेलन ने ग्राउंडेड थ्योरी (Grounded Theory) नामक गुणात्मक शोध पद्धति का उपयोग किया, जिसमें संख्याएँ गिनने के बजाय लोगों के लेखन और कथनों से अवधारणाएँ विकसित की जाती हैं। यह शोध पुस्तकालय उपयोगकर्ताओं की भावनाओं के व्यवस्थित अध्ययन का शुरुआती बिंदु बना।


चिंता के पाँच घटक

रोशनी से भरे विश्वविद्यालय के पुस्तकालय में बैग की पट्टी पकड़े एक विद्यार्थी का दृश्य, जो दूर से झिझकते हुए सूचना डेस्क की ओर देख रहा है, जहाँ पुस्तकालयाध्यक्ष कंप्यूटर पर काम में व्यस्त है

मेलन के सिद्धांत की संख्यात्मक पुष्टि नहीं हुई थी, इसलिए 1992 में शैरन बॉस्टिक (Sharon L. Bostick) ने अपने डॉक्टरेट शोधप्रबंध में पुस्तकालय संबंधी चिंता मापने के लिए ‘पुस्तकालय चिंता मापनी (Library Anxiety Scale)’ बनाई। 43 प्रश्नों वाली इस मापनी में पाँच स्तरों पर उत्तर दिए जाते हैं और इसमें चिंता को पाँच कारकों में बाँटा गया।

  • कर्मचारियों से जुड़ी बाधाएँ (Barriers with Staff): पुस्तकालयाध्यक्ष बहुत व्यस्त या ऐसे लगते हैं जिनसे बात करना कठिन हो, इसलिए मदद माँगने में झिझक होती है। पाँचों कारकों में इस कारक ने चिंता की सबसे अधिक व्याख्या की।
  • भावनात्मक बाधाएँ (Affective Barriers): लगता है कि सवाल पूछकर दूसरों को परेशान कर रहे हैं और यह असहायता महसूस होती है कि केवल मुझे ही उपयोग का तरीका नहीं आता।
  • पुस्तकालय में सहजता (Comfort with the Library): इसका संबंध इस बात से है कि पुस्तकालय सुरक्षित और स्वागत करने वाली जगह लगता है या नहीं, तथा वहाँ के नियम और माहौल अनजाने तो नहीं लगते।
  • पुस्तकालय का ज्ञान (Knowledge of the Library): यह इस बात की जानकारी का स्तर है कि सामग्री कहाँ है और उसे कैसे खोजा जाए।
  • उपकरण संबंधी बाधाएँ (Mechanical Barriers): कंप्यूटर, फ़ोटोकॉपी मशीन और प्रिंटर जैसे उपकरणों को चलाने में होने वाली कठिनाइयाँ।

बाद में इस मापनी का कई भाषाओं में अनुवाद और संशोधन हुआ और यह पुस्तकालय संबंधी चिंता के शोध में सबसे अधिक इस्तेमाल किया जाने वाला साधन बन गई।


पढ़ाई पर चिंता का प्रभाव

पुस्तकालय के वाचनालय में मेज़ पर अकेले बैठे एक विद्यार्थी का दृश्य, जिसने बंद किताब को एक तरफ खिसका दिया है और लैपटॉप के सामने ठुड्डी टिकाए चिंतित दिखाई दे रहा है

पुस्तकालय संबंधी चिंता केवल मनोदशा तक सीमित नहीं रहती, बल्कि पढ़ाई और शोध की गुणवत्ता को भी प्रभावित करती है।

[प्रभाव 1] बिना पूछे काम जैसे-तैसे पूरा कर देना

चिंतित उपयोगकर्ता पुस्तकालयाध्यक्ष से पूछने के बजाय कुछ परिचित खोज शब्दों से जो सामग्री आसानी से मिल जाती है, उसी का उपयोग करके रुक जाते हैं। इसके परिणामस्वरूप वे अधिक सटीक और विश्वसनीय सामग्री से चूक जाते हैं और असाइनमेंट में भी गहराई कम रह जाती है।

[प्रभाव 2] टालना और बचना

सामग्री खोजने से डर लगता हो, तो असाइनमेंट शुरू करने का काम ही टलने लगता है। माना जाता है कि पुस्तकालय संबंधी चिंता खास तौर पर उन लोगों में अधिक दिखाई देती है जिनके लिए माहौल नया हो, जैसे विश्वविद्यालय में नए आए विद्यार्थी, लंबे समय बाद दोबारा पढ़ाई शुरू करने वाले वयस्क और दूसरे देशों से आए अंतरराष्ट्रीय विद्यार्थी।


पुस्तकालय संबंधी चिंता कम करने के तरीके

रोशनी से भरे पुस्तकालय की अलमारियों के बीच एक पुस्तकालयाध्यक्ष का दृश्य, जो विद्यार्थी के साथ चलते हुए मुस्कुराकर अलमारियों की ओर इशारा करके रास्ता बता रहा है

पुस्तकालय संबंधी चिंता अकेले उपयोगकर्ता की समस्या नहीं है, इसलिए पुस्तकालय और उपयोगकर्ता मिलकर इसे कम कर सकते हैं।

(1) पहल करके उपयोगकर्ताओं से जुड़ने वाला पुस्तकालय
मेलन ने चिंता कम करने की कुंजी पुस्तकालयाध्यक्ष और उपयोगकर्ता के बीच आत्मीय मुलाकात के अनुभव को माना। यदि पुस्तकालयाध्यक्ष खुद बातचीत शुरू करें और पहली बार आने वाले विद्यार्थियों के लिए उपयोग का संक्षिप्त प्रशिक्षण व पुस्तकालय का परिचयात्मक भ्रमण, आसानी से समझ आने वाले सूचना पट्ट तथा चैट पर परामर्श जैसे ऐसे माध्यम उपलब्ध कराएँ जहाँ बिना झिझक सवाल पूछे जा सकें, तो कर्मचारियों से जुड़ी बाधाएँ बहुत कम हो जाती हैं।

(2) यह स्वीकार करना कि जानकारी न होना स्वाभाविक है
पुस्तकालय का उपयोग करना जन्मजात क्षमता नहीं, बल्कि सीखा जाने वाला कौशल है। यह जानना कि बहुत से लोग ऐसा ही डर महसूस करते हैं और छोटे सवालों से पूछना शुरू करना भी चिंता के चक्र को तोड़ सकता है।


पुस्तकालय संबंधी चिंता एक अदृश्य दीवार है, जो ज्ञान के द्वार पर लोगों को ठिठकने पर मजबूर करती है। इस दीवार की ऊँचाई पुस्तकालय कितना बड़ा है, इससे अधिक इस बात पर निर्भर करती है कि सवाल पूछने में कितनी सहजता महसूस होती है।

जो नहीं जानते, उस पर शर्मिंदा हुए बिना पुस्तकालयाध्यक्ष से बात शुरू करना ही पुस्तकालय से जुड़ने की राह में पहला कदम है।

पुस्तकालय संबंधी चिंता में तुलना, शर्म और सवाल पूछने से बचने को बाएँ से दाएँ जोड़ने वाला व्याख्यात्मक आरेख। छोटे सवाल, आत्मीय मार्गदर्शन, उपयोग का प्रशिक्षण और परामर्श के सुलभ माध्यम ऐसा वातावरण बनाते हैं जहाँ मदद माँगना आसान हो। इसका अर्थ यह नहीं है कि हर व्यक्ति इन्हें इसी क्रम में अनुभव करता है।
यह मेलन के शोध में सामने आए विचारों और सहायता की दिशाओं को सरल रूप में दिखाने वाला व्याख्यात्मक आरेख है। इसका अर्थ यह नहीं है कि सभी उपयोगकर्ता इन्हें एक ही क्रम में अनुभव करते हैं। स्रोत: Constance A. Mellon (1986), Library Anxiety: A Grounded Theory and Its Development, ACRL द्वारा पुनर्प्रकाशित मूल पाठ। जीके लाइब्रेरी का व्याख्यात्मक आरेख।

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