जब किसी छोटे बच्चे को पानी से भरा जग दिया जाता है, तो बड़े अक्सर पानी छलकने के डर से पहले ही हाथ बढ़ा देते हैं। लेकिन यदि बच्चे के हाथों के अनुकूल छोटा जग और गिलास देकर इंतज़ार किया जाए, तो कुछ बार पानी गिराने के बाद बच्चा आखिरकार खुद पानी डालना सीख लेता है। यानी सिखाने वाला जब एक कदम पीछे हटता है, तो बच्चा अधिक सीखता है। बच्चों को खुद चुनकर और करके सीखने में मदद देने की यही पद्धति ‘मॉन्टेसरी शिक्षा (Montessori Education)’ है।
सरल शब्दों में, मॉन्टेसरी शिक्षा का अर्थ है ‘बच्चे को सीखने की जन्मजात क्षमता रखने वाला मानना और सुव्यवस्थित परिवेश में उसे अपनी गतिविधियाँ खुद चुनने तथा हाथों से अभ्यास करके विकसित होने में मदद देना’। इटली की चिकित्सक और शिक्षाविद मारिया मॉन्टेसरी (Maria Montessori) ने 20वीं सदी की शुरुआत में यह पद्धति विकसित की थी। आज दुनिया भर के सरकारी और निजी विद्यालयों में इसका इस्तेमाल होता है।
इस सामग्री में हम क्रम से मॉन्टेसरी शिक्षा की उत्पत्ति की पृष्ठभूमि, इसकी कक्षा के मूल सिद्धांतों, बाल विकास के प्रति इसके दृष्टिकोण और आज इस शिक्षा के बारे में किए जा रहे आकलनों पर नज़र डालेंगे।
अपने आप काम करने की क्षमता विकसित करने वाली कक्षा: मॉन्टेसरी शिक्षा
मॉन्टेसरी शिक्षा की शुरुआत कैसे हुई?

मॉन्टेसरी शिक्षा की शुरुआत कक्षा से नहीं, बल्कि अस्पताल और अवलोकन से हुई थी। इसीलिए मॉन्टेसरी अपनी पद्धति को अक्सर ‘वैज्ञानिक शिक्षाशास्त्र’ कहती थीं।
(1) चिकित्सक से शिक्षाविद तक
मारिया मॉन्टेसरी 19वीं सदी के अंत में इटली की उन गिनी-चुनी महिलाओं में थीं जो चिकित्सक बनीं। उन्होंने मनोचिकित्सा और बाल चिकित्सा में विशेषज्ञता हासिल की। रोम के एक मनोरोग अस्पताल के दौरे पर उन्होंने गौर किया कि वहाँ बंद बच्चों को अधिक उत्तेजक अनुभवों की ज़रूरत थी।
(2) बच्चों का घर
1907 में मॉन्टेसरी ने रोम के सैन लोरेंज़ो क्षेत्र में आम लोगों के एक सामूहिक आवास भवन में अपनी पहली कक्षा, ‘बच्चों का घर (Casa dei Bambini)’, खोली। उन्होंने आर्थिक रूप से कमज़ोर परिवारों के उन बच्चों की ज़िम्मेदारी ली जिन्हें सीखने में कठिनाई होने वाला माना जाता था, और उनका अवलोकन करते हुए शिक्षण सामग्री तथा गतिविधियों में सुधार करती गईं।
(3) दुनिया भर में प्रसार
1909 में उन्होंने अपने सिद्धांतों को पुस्तक के रूप में प्रकाशित किया। 1912 में इस पुस्तक का ‘मॉन्टेसरी शिक्षा पद्धति (The Montessori Method)’ नाम से अंग्रेज़ी में अनुवाद हुआ। इसके बाद मॉन्टेसरी शिक्षा अमेरिका, यूरोप और भारत जैसे क्षेत्रों में तेज़ी से फैल गई।
कक्षा के मूल सिद्धांत

मॉन्टेसरी की कक्षा देखने में ही सामान्य कक्षा से अलग होती है। बच्चों के कद के अनुकूल नीची अलमारियों पर शिक्षण सामग्री करीने से रखी होती है, और बच्चे मेज़ या फ़र्श जैसी अपनी पसंद की जगह पर अलग-अलग गतिविधियाँ करते हैं।
(1) तैयार परिवेश
कक्षा की वस्तुओं का आकार बच्चों के शरीर के अनुकूल रखा जाता है। शिक्षण सामग्री को विषय के अनुसार व्यवस्थित करके इस तरह रखा जाता है कि बच्चे जब चाहें उसे निकालकर इस्तेमाल कर सकें। इसके पीछे यह विचार है कि व्यवस्था, सुंदरता और स्वाभाविकता से युक्त परिवेश स्वयं बच्चे को सिखाता है।
(2) चुनने की स्वतंत्रता और गतिविधियों के लिए लंबा समय
बच्चा तय सीमाओं के भीतर अपनी गतिविधि खुद चुनता है और बिना किसी व्यवधान के लंबे समय तक उसमें तल्लीन रहता है। आदर्श रूप में, दिन में एक बार लगभग तीन घंटे लगातार गतिविधियाँ करने का समय रखा जाता है।
(3) अलग-अलग उम्र के बच्चे और मार्गदर्शक शिक्षक
आमतौर पर 3 से 6 वर्ष जैसी अलग-अलग उम्र के बच्चे एक ही कक्षा में रहते हैं। छोटे बच्चे बड़े बच्चों को देखकर सीखते हैं, और बड़े बच्चे छोटों की मदद करके सीखते हैं। शिक्षक सामने खड़े होकर पढ़ाने के बजाय बच्चों का अवलोकन करते हैं और उपयुक्त गतिविधियों के लिए उनका मार्गदर्शन करते हैं।
(4) अंकों और पुरस्कारों की जगह गतिविधि का अपना आनंद
अंकों या प्रशंसा वाले स्टिकर जैसे बाहरी पुरस्कारों का इस्तेमाल किए बिना, बच्चों को किसी गतिविधि को पूरा कर पाने की खुशी से सीखने के लिए प्रेरित किया जाता है।

हाथों से सीखने की सामग्री और विकास की अवस्थाएँ

मॉन्टेसरी शिक्षा में अवधारणाएँ शब्दों से अधिक हाथों के अनुभव के ज़रिए समझ में आती हैं। शिक्षण सामग्री मुख्यतः लकड़ी जैसी प्राकृतिक सामग्रियों से बनाई जाती है, ताकि वह बच्चों की इंद्रियों को आकर्षित करे।
- दैनिक जीवन की गतिविधियाँ (Practical Life): पानी डालना, चम्मच से चीज़ें एक जगह से दूसरी जगह रखना, बर्तन धोना और फ़र्श बुहारना जैसे रोज़मर्रा के कौशल सीखे जाते हैं।
- रेगमाल के अक्षर (Sandpaper Letters): बच्चे रेगमाल से बने अक्षरों पर उँगली फेरते हुए उनका आकार और साथ ही उनकी ध्वनि सीखते हैं।
- सुनहरे मोती (Golden Bead Material): 1 मोती, 10 मोतियों की छड़, 100 मोतियों की पट्टी और 1,000 मोतियों के घन के ज़रिए बच्चे देखकर और हाथों से काम करके दशमलव संख्या पद्धति तथा गणना समझते हैं।
मॉन्टेसरी ने मानव विकास को चार चरणों में बाँटा: 0~6 वर्ष, 6~12 वर्ष, 12~18 वर्ष और 18~24 वर्ष। उनके अनुसार, विशेष रूप से पहले चरण के बच्चों में ‘अवशोषक मन (Absorbent Mind)’ होता है, जो आसपास की भाषा और संस्कृति को स्पंज की तरह सोख लेता है। वे ‘संवेदनशील अवधियों (Sensitive Periods)’ से भी गुज़रते हैं, जिनमें भाषा या व्यवस्था जैसी कुछ खास चीज़ों के प्रति उनका आकर्षण असाधारण रूप से बढ़ जाता है।
आज की मॉन्टेसरी शिक्षा

अनुमान है कि वर्तमान में दुनिया भर में लगभग 6 × दस हज़ार मॉन्टेसरी विद्यालय हैं। इसका उपयोग इतने व्यापक स्तर पर होता है, फिर भी कुछ पहलुओं पर ध्यान देना ज़रूरी है।
(1) शोध से सामने आने वाले परिणाम
कई अध्ययनों में बताया गया है कि मॉन्टेसरी शिक्षा पाने वाले बच्चों ने पढ़ने, एकाग्रता और सामाजिक कौशल जैसे क्षेत्रों में अच्छे परिणाम दिखाए। हालाँकि, पारिवारिक परिवेश जैसे अन्य कारकों के प्रभाव को अलग करना कठिन है, इसलिए कुछ अध्ययनों के परिणाम एक-दूसरे से अलग भी हैं।
(2) केवल नाम में समान मॉन्टेसरी
1967 में अमेरिकी पेटेंट और ट्रेडमार्क कार्यालय ने ‘मॉन्टेसरी’ को एक सामान्य नाम माना जिसका इस्तेमाल कोई भी कर सकता है। इसलिए मूल सिद्धांतों का पूरी तरह पालन न करने वाले संस्थान भी यही नाम इस्तेमाल कर सकते हैं। अध्ययनों के अनुसार, मूल पद्धति का जितना अधिक पालन किया गया, प्रभाव उतना ही अधिक दिखाई दिया।
(3) घर में भी अपनाए जा सकने वाले विचार
मॉन्टेसरी शिक्षा का मूल विशेष शिक्षण सामग्री से अधिक दृष्टिकोण में है। चीज़ों को बच्चे की पहुँच में रखना, उसे खुद कोशिश करने का समय देना और जल्दबाज़ी किए बिना उसे देखते रहना—इतने भर से इस भावना को रोज़मर्रा के जीवन में उतारा जा सकता है।
मॉन्टेसरी शिक्षा हमें बच्चे को ऐसा खाली पात्र मानने के बजाय, जिसे शिक्षा से भरना हो, अपने आप विकसित होने की क्षमता रखने वाले व्यक्ति के रूप में देखने में मदद करती है। यह पद्धति सौ वर्ष से भी अधिक पुरानी है, लेकिन तैयार परिवेश, चुनने की स्वतंत्रता और हाथों से काम करके सीखने के इसके विचार आज भी अनेक कक्षाओं और घरों को प्रभावित करते हैं। बच्चे के अपने दम पर काम पूरा कर पाने तक एक कदम पीछे हटकर इंतज़ार करना, अपने आप सीखने वाले बच्चे के पालन-पोषण की दिशा में शिक्षा का पहला कदम है।