समूह में दिए जाने वाले असाइनमेंट का खयाल आते ही बहुत से लोग आह भरने लगते हैं। ऐसा इसलिए है कि अक्सर एक-दो लोग सारा काम करते हैं और बाकी बस अपना नाम जुड़वा लेते हैं। लेकिन कक्षा को इस तरह संचालित करने का भी एक तरीका है जिसमें हर विद्यार्थी के पास एक अनिवार्य टुकड़ा होता है, और किसी एक के भी न होने पर तस्वीर पूरी नहीं हो सकती। यही है ‘जिगसॉ अधिगम (Jigsaw Classroom)’।
सरल शब्दों में, जिगसॉ अधिगम का अर्थ है ‘सीखने की विषयवस्तु को कई टुकड़ों में बाँटकर प्रत्येक विद्यार्थी को एक टुकड़े की जिम्मेदारी देना और फिर विद्यार्थियों को अपना-अपना भाग एक-दूसरे को सिखाकर पूरी विषयवस्तु तैयार करने देना’। यह सहयोगात्मक अधिगम की एक विधि है। इसका नाम जिगसॉ पहेली से लिया गया है, जिसमें कई टुकड़ों को जोड़कर एक तस्वीर बनाई जाती है।
इस सामग्री में हम क्रम से देखेंगे कि जिगसॉ अधिगम की शुरुआत किन परिस्थितियों में हुई, कक्षा किन चरणों में आगे बढ़ती है, इस विधि ने कक्षाओं में क्या बदलाव किए, और इसकी सीमाएँ तथा व्यावहारिक संचालन के तरीके क्या हैं।

वह कक्षा जहाँ सभी एक-दूसरे की पहेली का टुकड़ा बनते हैं
जिगसॉ अधिगम क्या है?

जिगसॉ अधिगम को 1971 में अमेरिका के टेक्सस राज्य के ऑस्टिन शहर में सामाजिक मनोवैज्ञानिक इलियट एरॉनसन (Elliot Aronson) और उनके स्नातकोत्तर विद्यार्थियों ने विकसित किया। उस समय ऑस्टिन के स्कूलों में नस्ली पृथक्करण अभी-अभी समाप्त हुआ था, और श्वेत, अश्वेत तथा हिस्पैनिक विद्यार्थी पहली बार एक ही कक्षा में बैठने लगे थे। लंबे समय से चले आ रहे संदेह और अविश्वास के कारण गलियारों और खेल के मैदानों में लगातार मारपीट होने लगी, तो शिक्षा अधीक्षक ने एरॉनसन से मदद माँगी।
कई दिनों तक कक्षाओं का अवलोकन करने के बाद एरॉनसन ने पाया कि प्रतिस्पर्धात्मक शिक्षण पद्धति संघर्ष को बढ़ा रही थी। शिक्षक के प्रश्न पूछते ही कुछ विद्यार्थी सबसे पहले हाथ उठाने की होड़ में लग जाते थे, जबकि बाकी सिर झुकाकर बस यही चाहते थे कि उनसे न पूछा जाए। यानी व्यवस्था ऐसी थी कि साथी के गलत उत्तर देने पर मैं बेहतर दिखाई देता था। इसलिए उन्होंने ऐसी कक्षा की रूपरेखा बनाई जिसमें प्रतिस्पर्धा के बजाय विद्यार्थियों को एक-दूसरे पर निर्भर होना पड़ता था।
पहली कक्षा प्राथमिक विद्यालय की कक्षा 5 में आयोजित हुई। एलेनर रूज़वेल्ट (Eleanor Roosevelt) का जीवन पढ़ते समय विद्यार्थियों को छोटे समूहों में बाँटा गया, जिनमें नस्ल और लिंग का संतुलित मिश्रण था। प्रत्येक विद्यार्थी ने उनके जीवन के एक भाग को सीखने की जिम्मेदारी ली।
- परस्पर निर्भरता (Interdependence): यह ऐसा संबंध है जिसे इस तरह बनाया जाता है कि सभी सदस्यों का ज्ञान जुड़ने पर ही पूरी विषयवस्तु समझी जा सके।
- व्यक्तिगत जवाबदेही (Individual Accountability): परीक्षा प्रत्येक विद्यार्थी अलग-अलग देता है, इसलिए कोई भी दूसरों के भरोसे काम नहीं चला सकता।
जिगसॉ अधिगम के 5 चरण

जिगसॉ अधिगम आम तौर पर निम्न क्रम में होता है। प्रत्येक समूह में प्रायः पाँच-छह विद्यार्थी होते हैं, और लिंग, पृष्ठभूमि तथा क्षमता का संतुलित मिश्रण रखा जाता है।
(1) समूह बनाना
विद्यार्थियों को विविधता वाले जिगसॉ समूहों (Jigsaw Group) में बाँटा जाता है। सीखने की विषयवस्तु भी समूह के सदस्यों की संख्या के बराबर टुकड़ों में बाँटी जाती है।
(2) टुकड़ों की जिम्मेदारी देना
प्रत्येक सदस्य एक टुकड़े की जिम्मेदारी लेकर उसकी सामग्री अकेले पढ़ता और सीखता है। उदाहरण के लिए, किसी व्यक्ति का जीवन पढ़ते समय बचपन, प्रमुख उपलब्धियाँ और जीवन के अंतिम वर्ष अलग-अलग विद्यार्थियों को सौंपे जा सकते हैं।
(3) विशेषज्ञ समूह में मिलना
अलग-अलग समूहों में एक ही टुकड़े की जिम्मेदारी लेने वाले विद्यार्थी विशेषज्ञ समूह (Expert Group) में मिलते हैं। वे मुख्य बातों को व्यवस्थित करते हैं और साथ मिलकर अभ्यास करते हैं कि मूल समूह में लौटकर उन्हें कैसे समझाएँगे।
(4) एक-दूसरे को सिखाना
विद्यार्थी अपने मूल समूह में लौटकर बारी-बारी से अपना भाग सिखाते हैं। बाकी सदस्य प्रश्न पूछकर अपनी समझ में छूटी बातें पूरी करते हैं।
(5) व्यक्तिगत मूल्यांकन
अंत में प्रत्येक विद्यार्थी पूरी विषयवस्तु की परीक्षा देता है। चूँकि मेरे अंक मेरे साथियों की व्याख्या पर निर्भर हैं, इसलिए सभी एक-दूसरे की बात ध्यान से सुनते हैं।
एक सरल उदाहरण से समझें जिगसॉ अधिगम का प्रभाव

एरॉनसन द्वारा बताई गई कार्लोस की कहानी जिगसॉ अधिगम की ताकत को अच्छी तरह दिखाती है।
[उदाहरण] उपहास का शिकार विद्यार्थी कैसे बना समूह का अनिवार्य सदस्य
अंग्रेज़ी में कमजोर होने के कारण कार्लोस हमेशा सहमा रहता था। पहली बार अपनी बारी आने पर उसका चेहरा लाल हो गया और वह हकलाने लगा, तो समूह के सदस्यों ने उसका मजाक उड़ाया। उस समय शोध सहायक ने उन्हें अच्छा व्यवहार करने की नसीहत देने के बजाय कहा, “इस तरह मजाक उड़ाने में तुम्हें मजा आ सकता है, लेकिन परीक्षा की विषयवस्तु में से तुम कुछ भी नहीं सीख पाओगे।” सदस्यों को जल्द समझ में आ गया कि कार्लोस को नीचा दिखाने से उनका अपना नुकसान होगा। उन्होंने अपना रवैया बदला और उससे सवाल पूछने तथा मदद करने लगे, ताकि वह अच्छी तरह समझा सके।
एरॉनसन की शोध टीम ने जिगसॉ पद्धति अपनाने वाली और उसे न अपनाने वाली कक्षाओं की तुलना की, तो कुछ ही सप्ताह में स्पष्ट अंतर दिखाई दिए। जिगसॉ अधिगम करने वाले विद्यार्थियों में पूर्वाग्रह और रूढ़ धारणाएँ कम हुईं, आत्मविश्वास बढ़ा, स्कूल के प्रति लगाव बढ़ा और अनुपस्थिति भी घटी। पहले कम अंक पाने वाले विद्यार्थियों के अंकों में काफी सुधार हुआ, जबकि पहले से अच्छा प्रदर्शन करने वाले विद्यार्थियों के अंक भी नहीं गिरे।
बाद में डायन ब्रिजमैन (Diane Bridgeman) ने बताया कि दो महीने तक जिगसॉ पद्धति से पढ़ने वाले कक्षा 5 के विद्यार्थियों में सामान्य कक्षा में पढ़ने वाले विद्यार्थियों की तुलना में दूसरे व्यक्ति की स्थिति में रखकर सोचने की सहानुभूतिपूर्ण क्षमता अधिक थी। इसकी व्याख्या यह की जाती है कि उन्हें साथियों की पूरी बात सुनने और यह समझने का बार-बार अनुभव मिला कि उन्हें किस बात में कठिनाई हो रही है।
जिगसॉ अधिगम की सीमाएँ और व्यावहारिक संचालन के तरीके

सभी अध्ययनों के परिणाम एक जैसे नहीं रहे हैं। जर्मनी में उच्च माध्यमिक विद्यालय की भौतिकी कक्षाओं की तुलना करने वाले 2007 के एक अध्ययन में जिगसॉ अधिगम करने वाले विद्यार्थियों की रुचि और प्रेरणा अधिक थी, लेकिन साथियों से सीखे गए भाग में उनके अंक सीधे शिक्षक से सीखने वाले विद्यार्थियों से कम थे। नॉर्वे में 2008 में प्रकाशित एक अध्ययन पूर्वाग्रह कम करने के प्रभाव की पुष्टि नहीं कर सका। यह बात भी लगातार उठाई जाती रही है कि समझाने वाले विद्यार्थी की क्षमता के अनुसार सीखने की गुणवत्ता बदल सकती है।
- विशेषज्ञ समूह की जाँच (Expert Group Check): शिक्षक को विशेषज्ञ समूहों में घूमकर गलत समझी गई बातों को पहले ही ठीक करना चाहिए, ताकि गलत जानकारी न फैले।
- टुकड़ों का संतुलन (Segment Balancing): प्रत्येक टुकड़े की मात्रा और कठिनाई लगभग समान रखनी चाहिए, ताकि किसी विशेष विद्यार्थी पर अधिक बोझ न पड़े।
- भूमिका निर्धारण (Role Assignment): समय का हिसाब रखने और बोलने की बारी सुनिश्चित करने वाला समूह प्रमुख तय करने से किसी एक व्यक्ति को पूरी बातचीत पर हावी होने से रोका जा सकता है।
जिगसॉ अधिगम सहयोगात्मक अधिगम की एक विधि है, जिसमें सीखने की विषयवस्तु को टुकड़ों में बाँटकर प्रत्येक विद्यार्थी को एक टुकड़े की जिम्मेदारी दी जाती है, और विद्यार्थी एक-दूसरे को सिखाते हुए पूरी विषयवस्तु तैयार करते हैं। प्रतिस्पर्धा से जकड़ी कक्षा में जन्मी इस विधि ने पढ़ाई को अकेले जीतने के काम से बदलकर मिलकर पूरा करने का काम बना दिया।
यह समझना कि बगल में बैठे साथी के पास वह टुकड़ा है जो मेरे पास नहीं है—यही साथ मिलकर आगे बढ़ने वाली कक्षा का पहला कदम है।