जब आप ऑनलाइन शॉपिंग साइट पर ऑर्डर का बटन दबाते हैं, तो कुछ घंटों बाद किसी लॉजिस्टिक्स केंद्र में कोई कर्मचारी आपके चुने हुए टूथब्रश, शैम्पू और मोज़ों को ठीक-ठीक ढूँढ़कर डिब्बे में रखता है। दसियों हज़ार तरह के सामान वाले विशाल गोदाम से केवल आपके ऑर्डर का सामान चुनकर निकालने का यही काम ‘ऑर्डर पिकिंग (Order Picking)’ कहलाता है।
सरल शब्दों में, ऑर्डर पिकिंग का अर्थ है ‘ग्राहक के ऑर्डर के अनुसार भंडारण स्थान से आवश्यक वस्तुओं को आवश्यक मात्रा में निकालकर इकट्ठा करना’। देखने में यह सामान्य खरीदारी जैसा लगता है, लेकिन गोदाम की संचालन लागत में इसका हिस्सा सबसे बड़ा होता है, इसलिए लॉजिस्टिक्स की दक्षता का आकलन करते समय सबसे पहले इसी पर ध्यान दिया जाता है।
इस लेख में हम क्रम से ऑर्डर पिकिंग की अवधारणा और लागत संरचना, काम के दौरान समय खर्च होने के बिंदुओं, प्रमुख पिकिंग विधियों और रोबोट तथा तकनीक से बदलते पिकिंग के स्वरूप को समझेंगे।
ऑर्डर पिकिंग के सिद्धांत और दक्षता बढ़ाने के तरीके
ऑर्डर पिकिंग क्या है?

पारंपरिक गोदाम का काम मोटे तौर पर चार चरणों में बँटता है: माल प्राप्त करना, भंडारण, पिकिंग और माल रवाना करना। इनमें पिकिंग वह कड़ी है जो भंडारित सामान को ऑर्डर के अनुसार दोबारा समूहों में बाँटकर रवानगी के लिए भेजती है। सामान भले ही पूरे पैलेट में आए, ग्राहक उसे एकल वस्तुओं या कुछ डिब्बों की मात्रा में मँगाते हैं, इसलिए गोदाम में किसी को बड़े समूहों को छोटे ऑर्डरों में बदलना पड़ता है।
समस्या यह है कि इसी काम में सबसे ज़्यादा शारीरिक मेहनत और पैदल आवाजाही लगती है। लॉजिस्टिक्स संबंधी शोध में इस अनुमान का व्यापक रूप से उल्लेख होता है कि ऑर्डर पिकिंग की लागत गोदाम की कुल संचालन लागत के अधिकतम 55% तक पहुँच सकती है। पिकिंग में देरी होने पर माल की रवानगी और डिलीवरी में भी लगातार देरी होती है, और गलत सामान रखने पर वापसी तथा दोबारा डिलीवरी की लागत भी जुड़ जाती है। इसलिए पिकिंग की गति और सटीकता सीधे ग्राहक सेवा की गुणवत्ता से जुड़ी हैं।
समय कहाँ खर्च होता है: पिकिंग कार्य के घटक

जिन गोदामों में कर्मचारी स्वयं अलमारियों के बीच आते-जाते हैं, वहाँ पिकिंग का समय किन कामों में खर्च होता है, इसका विश्लेषण किया गया है। अमेरिका में सुविधा नियोजन की प्रसिद्ध पाठ्यपुस्तक के लेखक जेम्स ए. टॉम्पकिंस (James A. Tompkins) और उनके सहलेखकों की सामग्री के अनुसार, पिकिंग का समय मोटे तौर पर इस प्रकार बँटता है।
(1) आवाजाही लगभग 50%
यह सामान के स्थान तक पैदल जाने और वापस आने में लगने वाला समय है। इससे कोई मूल्य नहीं जुड़ता, फिर भी इसमें सबसे अधिक समय लगता है, इसलिए सुधार के लिए सबसे पहले इसी पर ध्यान दिया जाता है।
(2) ढूँढ़ना लगभग 20%
यह अलमारी के सामने पहुँचने के बाद सही खाने और सामान की पहचान करने में लगने वाला समय है। एक जैसी पैकिंग वाले सामान जितने अधिक होंगे, उतना ही अधिक समय लगेगा और गलतियाँ भी बढ़ेंगी।
(3) निकालना लगभग 15%
यह सामान उठाने, उसकी मात्रा गिनने और उसे पात्र में रखने में लगने वाला समय है।
(4) तैयारी लगभग 10%
यह ऑर्डर की पर्ची लेने और कार्ट तथा पात्र तैयार करने में लगने वाला समय है। शेष कुछ प्रतिशत समय अन्य छोटे-मोटे कामों में खर्च होता है।
आखिरकार पिकिंग की दक्षता बढ़ाने की कुंजी है ‘पैदल चलने की ज़रूरत कम करना’। इसलिए अधिक बिकने वाले सामान को रवानगी क्षेत्र के पास रखना और काम का क्रम ऐसा बनाना महत्वपूर्ण हो जाता है कि कर्मचारी सबसे छोटे रास्ते से अपना चक्कर पूरा कर सकें।
परिस्थिति के अनुसार चुनने योग्य 4 पिकिंग विधियाँ


ऑर्डरों की संख्या और प्रकृति के अनुसार पिकिंग को समूहों में बाँटने और अलग करने का तरीका भी बदलता है। प्रमुख विधियाँ निम्नलिखित हैं।
- एकल ऑर्डर पिकिंग (Single Order Picking): इसमें एक कर्मचारी एक ऑर्डर का पूरा सामान शुरू से अंत तक इकट्ठा करता है। यह सरल है और इसमें गलतियाँ कम होती हैं, लेकिन ऑर्डर अधिक होने पर चलने की दूरी बहुत बढ़ जाती है।
- बैच पिकिंग (Batch Picking): इसमें कई ऑर्डरों को एक साथ जोड़कर एक ही सामान को एक बार में निकाला जाता है और बाद में उसे ऑर्डर के अनुसार बाँटा जाता है। यह कम मात्रा वाले बहुत से ऑर्डरों वाली ऑनलाइन खरीदारी के लिए उपयुक्त है।
- ज़ोन पिकिंग (Zone Picking): इसमें गोदाम को कई क्षेत्रों में बाँट दिया जाता है और हर कर्मचारी केवल अपने निर्धारित क्षेत्र का सामान इकट्ठा करता है। इससे बड़े गोदामों में आवाजाही कम होती है।
- वेव पिकिंग (Wave Picking): इसमें डिलीवरी वाहनों के प्रस्थान समय जैसे मानदंडों के अनुसार ऑर्डरों को समयखंडों के समूहों में काम के लिए जारी किया जाता है। इससे पिकिंग को माल की रवानगी की समय-सारणी के साथ मिलाना आसान होता है।
एक सरल उदाहरण लें: मान लीजिए कि आपको परिवार के पाँच सदस्यों के लिए किसी बड़े सुपरमार्केट से खरीदारी करनी है। हर व्यक्ति के लिए अलग-अलग खरीदारी करने पर एक ही शेल्फ के सामने से पाँच बार गुज़रना पड़ेगा, लेकिन सूचियाँ जोड़कर केवल एक चक्कर लगाने और घर पर सामान बाँटने से काम बहुत तेज़ होगा। यही बैच पिकिंग का सिद्धांत है।
कर्मचारियों के चलकर जाने वाले गोदाम से सामान के खुद आने वाले गोदाम तक

पारंपरिक विधि ‘कर्मचारी से सामान तक (Picker-to-Parts)’ है, जिसमें कर्मचारी सामान ढूँढ़ने जाता है। हाल के समय में इसके उलट ‘सामान से कर्मचारी तक (Goods-to-Person)’ विधि तेज़ी से बढ़ रही है, जिसमें सामान एक स्थान पर खड़े कर्मचारी के पास आता है।
इस बदलाव की एक प्रतीकात्मक घटना 2012 में अमेज़न द्वारा गोदाम रोबोट बनाने वाली कंपनी किवा सिस्टम्स (Kiva Systems) को लगभग 7 × दस करोड़ और 7,500 × दस हज़ार डॉलर में खरीदना थी। किवा के रोबोट सामान से भरी पूरी अलमारी उठाकर कार्यस्थल तक पहुँचाते हैं और कर्मचारी अपनी जगह पर रहकर केवल आवश्यक सामान निकालता है। अमेज़न ने बताया कि 2022 तक वह इस प्रकार की 52 × दस हज़ार से अधिक रोबोटिक ड्राइव इकाइयाँ संचालित कर रहा था।
रोबोट के अलावा भी पिकिंग में सहायता करने वाली कई तकनीकें हैं।
- पिकिंग संकेतक लाइट (Pick-to-Light): जिस खाने से सामान निकालना हो, वहाँ लाइट जलती है और मात्रा दिखाई जाती है, जिससे ढूँढ़ने में लगने वाला समय कम होता है।
- वॉइस पिकिंग (Voice Picking): कर्मचारी हेडसेट से स्थान और मात्रा सुनता है तथा बोलकर पुष्टि करता है, जिससे दोनों हाथ स्वतंत्र रूप से काम कर सकते हैं।
- बारकोड स्कैनिंग (Barcode Scanning): हर बार सामान रखते समय उसे स्कैन किया जाता है, जिससे गलत सामान रखने की गलती तुरंत पकड़ में आ जाती है।
ऑर्डर पिकिंग उपभोक्ताओं को आसानी से दिखाई नहीं देती, लेकिन यह लॉजिस्टिक्स का केंद्रीय काम है, जो गोदाम की लगभग आधी लागत को प्रभावित करता है और डिलीवरी की गति तथा सटीकता तय करता है। आवाजाही कम करने वाली व्यवस्था, ऑर्डरों को समूहों में जोड़ने के तरीके और कर्मचारियों की सहायता करने वाली तकनीकें जब एक साथ तालमेल से काम करती हैं, तभी दक्षता बढ़ती है।
‘जल्दी सामान रखने’ और ‘सही सामान रखने’ के बीच संतुलन बनाना आगे भी लॉजिस्टिक्स क्षेत्र की चुनौती बना रहेगा। गोदाम को इस तरह डिज़ाइन करना कि कर्मचारी कम चलें और कम उलझन के साथ काम करें, तेज़ और सटीक लॉजिस्टिक्स की ओर पहला कदम है।