आजकल विश्वविद्यालय के छात्र स्नातक शिक्षा पूरी होने से पहले अक्सर एक बैकपैक लेकर यूरोप की यात्रा पर निकल पड़ते हैं। ट्रेन से पेरिस, रोम और वेनिस घूमते हुए वे उन चित्रों और ऐतिहासिक अवशेषों को अपनी आँखों से देखते हैं जिन्हें अब तक केवल किताबों में देखा था। लेकिन ऐसी यात्राओं का एक पुराना प्रारूप है, जिसकी परंपरा सैकड़ों वर्ष पहले से चली आ रही है। यह है ‘ग्रैंड टूर (Grand Tour)’, यूरोप की वह लंबी यात्रा जिस पर 17वीं शताब्दी से 19वीं शताब्दी की शुरुआत तक ब्रिटिश अभिजात युवक अपनी शिक्षा पूरी करने के लिए जाते थे।
सरल शब्दों में, ग्रैंड टूर का अर्थ है ‘वह शैक्षिक यात्रा जिसमें उच्च वर्ग के युवा वयस्क होने के आसपास अपने निजी शिक्षक के साथ यूरोपीय महाद्वीप घूमकर शास्त्रीय संस्कृति और सामाजिक शिष्टाचार सीखते थे।’ कुछ महीनों से लेकर कई वर्षों तक चलने वाली इस यात्रा को ऐसा शुरुआती बिंदु माना जाता है जिसमें आज के पर्यटन के कई रूप पहले ही दिखाई देने लगे थे।
इस लेख में हम क्रम से ग्रैंड टूर के अर्थ और उद्गम, उसके प्रमुख यात्रा मार्गों, यात्रियों द्वारा छोड़े गए प्रभावों और आधुनिक पर्यटन तक पहुँचाने वाले बदलावों को देखेंगे।

अभिजातों की शैक्षिक यात्रा से आधुनिक पर्यटन तक
ग्रैंड टूर क्या है?

ग्रैंड टूर लगभग 1660 के आसपास से लेकर 1840 के दशक तक बहुत प्रचलित परंपरा थी, जब रेलमार्गों का व्यापक प्रसार हो गया। मुख्य रूप से ब्रिटेन के अभिजात और धनी ज़मींदार परिवारों के युवक लगभग 21 वर्ष के होने पर यात्रा पर निकलते थे।
(1) नाम का उद्गम
ऑक्सफ़र्ड अंग्रेज़ी शब्दकोश के अनुसार, ‘ग्रैंड टूर’ शब्द का पहला दर्ज प्रयोग ब्रिटिश कैथोलिक पादरी रिचर्ड लैसल्स (Richard Lassels) की पुस्तक ‘इटली की यात्रा (The Voyage of Italy)’ में मिलता है। यह पुस्तक उनकी मृत्यु के बाद 1670 में प्रकाशित हुई थी। इससे पहले, 1613 से 1614 के बीच, कला संग्रह के लिए प्रसिद्ध अरुंडेल के अर्ल (Earl of Arundel) ने इनिगो जोन्स (Inigo Jones) को अपना मार्गदर्शक बनाकर नेपल्स तक इटली की यात्रा की थी; जोन्स बाद में एक प्रसिद्ध वास्तुकार बने। इस यात्रा को ग्रैंड टूर का एक महत्वपूर्ण पूर्व उदाहरण माना जाता है।
(2) यात्रा का उद्देश्य
ग्रैंड टूर का सबसे बड़ा उद्देश्य प्राचीन रोम और पुनर्जागरण की सांस्कृतिक विरासत को प्रत्यक्ष देखकर सीखना था। उस समय फ़ोटोग्राफ़ी नहीं थी, इसलिए किसी प्रसिद्ध चित्र या मूर्ति को ठीक से देखने के लिए उस स्थान तक स्वयं जाना पड़ता था जहाँ वह मौजूद था। इतिहासकार एडवर्ड गिबन (Edward Gibbon) ने यह भी कहा था कि विदेश यात्रा एक ब्रिटिश सज्जन की शिक्षा को पूर्ण करती है।
ग्रैंड टूर के प्रमुख मार्ग

कोई एक निश्चित मार्ग नहीं था, लेकिन बहुत से यात्री मिलते-जुलते मार्गों पर चलते थे। आमतौर पर एक निजी शिक्षक साथ होता था, जिसे अपरिपक्व अभिजात युवकों को साथ लेकर चलने के अर्थ में ‘भालू हाँकने वाला (bear-leader)’ उपनाम दिया गया था।
- पेरिस (Paris): यात्री फ्रेंच भाषा सीखते थे, जो उस समय यूरोप के उच्च वर्ग की साझा भाषा थी, और नृत्य, तलवारबाज़ी तथा घुड़सवारी सीखकर सामाजिक शिष्टाचार निखारते थे।
- आल्प्स (Alps): जिनेवा जैसे स्विस शहरों में ठहरने के बाद यात्री दुर्गम पहाड़ी रास्ते पार करते थे। यह हिस्सा इतना कठिन था कि घोड़ागाड़ी को खोलकर उसके पुर्ज़ों को सामान की तरह ढोना पड़ता था।
- इटली (Italy): फ़्लोरेंस और वेनिस से होकर यात्री रोम पहुँचते थे, जहाँ वे प्राचीन अवशेषों और उत्कृष्ट कलाकृतियों का अध्ययन करते थे। 18वीं शताब्दी के मध्य से वे दक्षिण में नेपल्स तक जाकर हाल ही में खुदाई से सामने आए हरकुलेनियम और पोम्पेई भी देखने लगे।
- वापसी का मार्ग (Return Route): यात्री जर्मन भाषी शहरों, नीदरलैंड और फ़्लैंडर्स में घूमकर और कला संग्रहालय देखने के बाद ब्रिटेन लौटते थे।
यात्रियों के छोड़े हुए प्रभाव

ग्रैंड टूर केवल किसी एक यात्री के अनुभव तक सीमित नहीं रहा, बल्कि उसने यूरोप के कला बाज़ार और यात्रा संस्कृति पर गहरा प्रभाव छोड़ा।
[उदाहरण 1] स्मृति चिह्न बने चित्र और मूर्तियाँ
यात्री किताबें, कलाकृतियाँ, वैज्ञानिक उपकरण, प्राचीन सिक्के और मूर्तियाँ संदूक भरकर खरीदते थे और अपने देश भेजते थे। रोम के चित्रकार पोम्पेओ बाटोनी (Pompeo Batoni) ने प्राचीन अवशेषों की पृष्ठभूमि में ब्रिटिश युवकों के व्यक्तिचित्र बनाकर प्रसिद्धि पाई, और वेनिस के दृश्यों को बारीकी से चित्रित करने वाले कानालेत्तो (Canaletto) के चित्र भी बहुत लोकप्रिय हुए। आज की यात्रा तस्वीरों की तरह ये चित्र ‘मैं वहाँ गया था’ का प्रमाण थे।
[उदाहरण 2] मार्गदर्शिकाओं और यात्रा वृत्तांतों का उदय
18वीं शताब्दी के मध्य से ग्रैंड टूर के लिए बड़ी संख्या में मार्गदर्शिकाएँ प्रकाशित होने लगीं, और शहरों के नक्शों वाली किताबें भी बढ़ीं। यात्रा पूरी करने वाले लोग अपने-अपने यात्रा वृत्तांत प्रकाशित करते थे, और ये विवरण अगली पीढ़ी के यात्रियों के लिए एक और मार्गदर्शक बने।
[उदाहरण 3] आलोचना और रूढ़ धारणाएँ
ग्रैंड टूर की हमेशा प्रशंसा ही नहीं हुई। उसकी आलोचना एक ऐसी नीरस यात्रा के रूप में भी हुई जिसमें लोग बार-बार उन्हीं स्थानों पर जाते थे, और यह भी कहा गया कि वह अलग-अलग देशों के लोगों के बारे में रूढ़ धारणाओं को और मज़बूत करती है। इटली को केवल ‘सुंदर, लेकिन अतीत में ठहरा हुआ देश’ मानने वाला नज़रिया भी इसी समय फैला।
ग्रैंड टूर से आधुनिक पर्यटन तक का सफ़र

19वीं शताब्दी में भाप के जहाज़ और रेलगाड़ियाँ आने से यात्रा का स्वरूप बहुत बदल गया। यात्रा अधिक सस्ती, सुरक्षित और आसान हो गई, और अभिजात वर्ग के बाहर के लोग भी यात्रा पर जाने लगे। 19वीं शताब्दी के उत्तरार्ध में उच्च वर्ग की युवतियाँ भी अभिभावकों के साथ इटली की यात्रा करने लगीं, और औद्योगीकरण से धनी बने अमेरिकी भी यूरोपीय संस्कृति सीखने के लिए अटलांटिक पार करने लगे। अमेरिकी लेखक मार्क ट्वेन (Mark Twain) ने ऐसी यात्राओं पर मनोरंजक व्यंग्य करने वाला यात्रा वृत्तांत ‘The Innocents Abroad’ 1869 में प्रकाशित किया, जो बहुत लोकप्रिय हुआ।
(1) सामूहिक यात्रा की शुरुआत
1841 में ब्रिटेन के थॉमस कुक (Thomas Cook) ने लेस्टर से लफ़बरो तक एक ट्रेन किराए पर लेकर लगभग 500 लोगों की सामूहिक यात्रा आयोजित की। इसके बाद उन्होंने यूरोपीय महाद्वीप की सैर कराने वाले यात्रा पैकेज भी बनाए, और ‘कुक की यात्रा (Cook’s Tour)’ जन पर्यटन का प्रतीक बन गई।
(2) आज की यात्राओं में बची विरासत
तय दर्शनीय स्थलों को क्रम से देखने की यात्रा योजना, मार्गदर्शिकाएँ और गाइड, स्मृति चिह्न खरीदना तथा यात्रा वृत्तांत लिखने की आदत—ये सब ग्रैंड टूर में पहले ही दिखाई देने लगे थे। स्नातक शिक्षा पूरी होने पर की जाने वाली यात्राओं या बैकपैक यात्राओं की तरह ‘यात्रा से व्यक्ति थोड़ा और विकसित होता है’ का विचार भी उसी भावना की विरासत माना जा सकता है।
ग्रैंड टूर कुछ अभिजातों का विशेषाधिकार था, लेकिन अनजान जगहों को स्वयं देखकर सीखने की इच्छा में वे आज के यात्रियों से अलग नहीं थे। आवागमन के साधन घोड़ागाड़ी से हवाई जहाज़ तक बदल गए हैं, फिर भी यह विश्वास बना हुआ है कि यात्रा व्यक्ति का दृष्टिकोण व्यापक बनाती है।
परिचित जगहों से निकलकर एक अलग दुनिया को जानने की इच्छा ही अच्छी यात्रा का पहला कदम है।