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शोधपत्रों की वंशावली, उद्धरण सूचकांक (Citation Index)

यदि रिपोर्ट लिखने के लिए आपको एक अच्छा शोधपत्र मिल गया है, तो इसके बाद आपको क्या पढ़ना चाहिए? आप उस शोधपत्र की संदर्भ सूची के सहारे अतीत में पीछे जा सकते हैं, या इसके विपरीत, उस शोधपत्र को उद्धृत करने वाले अधिक नए शोध खोजकर आगे बढ़ सकते हैं। इस तरह उद्धृत शोधपत्र से शुरू करके उसे उद्धृत करने वाले बाद के शोधपत्रों तक संबंधों को उलटी दिशा में जोड़ने वाला साधन ही ‘उद्धरण सूचकांक (Citation Index)’ है।

सरल शब्दों में, उद्धरण सूचकांक का अर्थ है ‘ऐसी सूची जिसमें यह व्यवस्थित किया गया हो कि किसी दस्तावेज़ को बाद में किन दस्तावेज़ों में उद्धृत किया गया’। विषय शब्दों के आधार पर सामग्री खोजने वाले सामान्य सूचकांक से अलग, यह उद्धरण की कड़ियों के सहारे संबंधित शोध खोजने में मदद करता है। इसी विशेषता ने पुस्तकालय एवं सूचना विज्ञान और अकादमिक खोज की दिशा को काफी बदल दिया।

इस सामग्री में उद्धरण सूचकांक की उत्पत्ति की पृष्ठभूमि और अवधारणा से लेकर उद्धरण संबंधों के सहारे खोज करने के तरीकों, उद्धरण सूचकांक से निकले प्रमुख संकेतकों और संख्याओं का उपयोग करते समय ध्यान रखने योग्य बातों तक को सरल ढंग से समझाया गया है।


उद्धरण सूचकांक के सिद्धांत और उपयोग

उद्धरण सूचकांक क्या है?

उद्धरण सूचकांक में उद्धरण संबंधों और खोज की दिशाओं के बीच अंतर दिखाने वाला काल्पनिक उदाहरण। ऊपर के नीले तीर दिखाते हैं कि शोधपत्र C, A को और A, B को उद्धृत करता है। नीचे के नारंगी तीर A से शुरू करके संदर्भ सूची में दिए गए B को पीछे की ओर खोजने या A को उद्धृत करने वाले बाद के शोधपत्र C तक पहुँचने की खोज दिशा दिखाते हैं। यह बताता है कि उद्धरण का अर्थ समर्थन होना आवश्यक नहीं है और खोज के परिणाम संग्रह के दायरे तथा अद्यतन के समय के अनुसार बदलते हैं।
एक पुराने विश्वविद्यालय पुस्तकालय का वाचन कक्ष, जहाँ ऊँची अलमारियों में शोध पत्रिकाओं के जिल्दबंद खंड रखे हैं और एक सूचकांक पुस्तक खुली हुई है

उद्धरण सूचकांक का विचार अप्रत्याशित रूप से कानून के क्षेत्र से आया था। अमेरिका में 1873 से ‘शेपर्ड्स साइटेशन्स (Shepard's Citations)’ प्रकाशित होता आया है, जिसमें यह व्यवस्थित किया जाता रहा है कि किसी न्यायिक मिसाल को बाद के किन निर्णयों में उद्धृत किया गया। न्यायिक मिसालों को महत्त्व देने वाले विधि जगत में यह पुस्तक जाँचने का अनिवार्य साधन थी कि कोई निर्णय अब भी मान्य है या नहीं।

अमेरिकी सूचना वैज्ञानिक यूजीन गारफील्ड (Eugene Garfield) ने इस तरीके को वैज्ञानिक साहित्य पर लागू करने का प्रस्ताव रखा। उन्होंने 1955 में ‘साइंस (Science)’ पत्रिका में प्रकाशित एक लेख में तर्क दिया कि यदि प्रत्येक शोधपत्र के साथ उसे उद्धृत करने वाले बाद के शोधपत्रों को एकत्र कर दिया जाए, तो शोधकर्ता विचारों के संबंधों का अनुसरण करके सामग्री खोज सकते हैं।

यह परिकल्पना उनके स्थापित किए गए वैज्ञानिक सूचना संस्थान (Institute for Scientific Information) के माध्यम से साकार हुई। गारफील्ड के अभिलेखों के अनुसार पहला ‘विज्ञान उद्धरण सूचकांक (Science Citation Index)’ 1963 में प्रकाशित हुआ था (वर्तमान में इसका संचालन करने वाली क्लैरिवेट (Clarivate) की आधिकारिक समयरेखा में वर्ष 1964 दर्ज है), और यही आज के अकादमिक डेटाबेस वेब ऑफ साइंस (Web of Science) की नींव बना। 2004 में गूगल स्कॉलर (Google Scholar) और स्कोपस (Scopus) के एक के बाद एक सामने आने से उद्धरणों के सहारे खोज करना शोधकर्ताओं के साथ-साथ विद्यार्थियों के लिए भी एक परिचित तरीका बन गया।


उद्धरण संबंधों के सहारे खोज करने के 3 तरीके

एक मेज़ पर फैले शोधपत्र, जिन्हें लाल धागे से आपस में जोड़ा गया है

उद्धरण सूचकांक की सबसे बड़ी ताकत यह है कि विषय शब्द न मालूम होने पर भी संबंधित शोध खोजे जा सकते हैं। अलग-अलग विद्वान एक ही अवधारणा के लिए अलग शब्द इस्तेमाल करें, तब भी यदि उन्होंने एक ही शोधपत्र को उद्धृत किया है, तो वे आपस में जुड़ जाते हैं।

(1) पीछे की ओर खोज
आप जिस शोधपत्र को अभी पढ़ रहे हैं, उसकी संदर्भ सूची के सहारे उन पुराने दस्तावेज़ों को खोजते हैं जिन पर वह शोध आधारित था। इससे पता चलता है कि किसी विचार की शुरुआत कहाँ से हुई।

(2) आगे की ओर खोज
उद्धरण सूचकांक की मदद से उस शोधपत्र को उद्धृत करने वाले बाद के शोध खोजते हैं। इससे जाँचा जा सकता है कि वह विचार कैसे विकसित हुआ और उसकी क्या आलोचनाएँ हुईं।

(3) साथ उद्धृत दस्तावेज़ों की खोज
यदि दो शोधपत्रों को कई अन्य शोधपत्रों में अक्सर एक साथ उद्धृत किया जाता है, तो उनकी विषयवस्तु में निकटता होने की संभावना अधिक होती है। इसे ‘सह-उद्धरण (Co-citation)’ कहते हैं और इसका उपयोग शैक्षणिक क्षेत्रों का मानचित्र बनाने में किया जाता है।

उदाहरण के लिए, यदि 1953 में DNA की दोहरी कुंडलित संरचना स्पष्ट करने वाले जेम्स वॉटसन (James Watson) और फ्रांसिस क्रिक (Francis Crick) के शोधपत्र को शुरुआती बिंदु बनाया जाए, तो केवल आगे की ओर खोज करके भी उस खोज पर आधारित, कई दशकों तक चले आणविक जीवविज्ञान के शोध का अनुसरण किया जा सकता है।


उद्धरण सूचकांक से निकले प्रमुख संकेतक

पुस्तकालय के मॉनिटर पर बिंदुओं और रेखाओं के नेटवर्क को देख रहे एक शोधकर्ता का पीछे से दृश्य

उद्धरणों के अभिलेख जमा होने पर लोगों ने उन्हें गिनकर शोध पत्रिकाओं और शोधकर्ताओं के प्रभाव का आकलन करना शुरू किया। दस्तावेज़ों का इस तरह मात्रात्मक विश्लेषण करने वाले क्षेत्र को ‘ग्रंथमितिकी (Bibliometrics)’ कहते हैं।

  • उद्धरण संख्या (Citation Count): किसी शोधपत्र को अन्य दस्तावेज़ों में जितनी बार उद्धृत किया गया है, उसकी संख्या। यह सबसे सरल और बुनियादी संकेतक है।
  • पत्रिका प्रभाव गुणांक (Journal Impact Factor): किसी शोध पत्रिका में पिछले 2 वर्षों के दौरान प्रकाशित शोधपत्रों को इस वर्ष मिले उद्धरणों की संख्या को, उसी अवधि में प्रकाशित उद्धरण योग्य शोधपत्रों की संख्या से भाग देने पर प्राप्त मान। गारफील्ड ने सबसे पहले इसे शोध पत्रिकाएँ चुनने के मानदंड के रूप में विकसित किया था।
  • एच सूचकांक (h-index): यह भौतिक विज्ञानी होर्हे हिर्श (Jorge Hirsch) द्वारा 2005 में प्रस्तावित संकेतक है। यह h का वह अधिकतम मान है जिसके लिए किसी शोधकर्ता के कम-से-कम h शोधपत्रों में से प्रत्येक को कम-से-कम h बार उद्धृत किया गया हो।

उदाहरण के लिए, यदि किसी शोधकर्ता का h सूचकांक 10 है, तो इसका अर्थ है कि उनके कम-से-कम 10 बार उद्धृत किए गए शोधपत्रों की संख्या कम-से-कम 10 है। शोधपत्रों की संख्या और उद्धरणों की संख्या दोनों को साथ दर्शाने के लाभ के कारण इसका व्यापक उपयोग होता है।


उद्धरण संकेतकों का उपयोग करते समय ध्यान रखने योग्य 4 बातें

एक पीतल का तराजू, जिसके एक पलड़े पर शोध पत्रिकाओं का ढेर और दूसरे पर एक पतला शोधपत्र रखा है

उद्धरणों की संख्या सुविधाजनक है, लेकिन यह शोध के मूल्य को ज्यों का त्यों दिखाने वाला दर्पण नहीं है।

(1) हर क्षेत्र की उद्धरण संस्कृति अलग होती है
जीव विज्ञान में शोधपत्र बहुत होते हैं और उद्धरण भी खूब दिए जाते हैं, जबकि गणित या मानविकी में उद्धरणों की संख्या बहुत कम होती है। अलग-अलग क्षेत्रों की संख्याओं की सीधी तुलना नहीं करनी चाहिए।

(2) उद्धरण केवल प्रशंसा नहीं होते
किसी गलत शोध की आलोचना करने के लिए दिए गए उद्धरण को भी गिनती में उसी तरह एक उद्धरण माना जाता है।

(3) जितनी अधिक प्रसिद्धि, उतने अधिक उद्धरण
समाजशास्त्री रॉबर्ट मर्टन (Robert Merton) ने 1968 में पहले से प्रसिद्ध विद्वानों को अधिक मान्यता मिलने की परिघटना को ‘मैथ्यू प्रभाव (Matthew Effect)’ कहा था। उद्धरणों की संख्या में भी ऐसा झुकाव दिखाई देता है।

(4) पत्रिका के संकेतकों से किसी व्यक्ति का मूल्यांकन नहीं करना चाहिए
2012 में तैयार की गई सैन फ्रांसिस्को शोध मूल्यांकन घोषणा (San Francisco Declaration on Research Assessment) ने सिफारिश की कि शोध पत्रिकाओं के प्रभाव गुणांक के आधार पर व्यक्तिगत शोधपत्रों या शोधकर्ताओं का मूल्यांकन न किया जाए।


उद्धरण सूचकांक ने शोधपत्रों के बीच मौजूद अदृश्य पुलों को उजागर करके दिखाया कि ज्ञान कैसे जुड़ता और विकसित होता है। आज अकादमिक खोज में हम एक क्लिक से ‘इस शोधपत्र को उद्धृत करने वाले दस्तावेज़’ देख पाते हैं, यह भी गारफील्ड की परिकल्पना की देन है।

संख्याओं से अधिक, उन संख्याओं से संकेतित विचारों के प्रवाह को समझना ही अकादमिक जानकारी का विवेकपूर्ण उपयोग करने की दिशा में पहला कदम है।

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