कभी आपने अलमारी के भीतर लंबे समय से रखी पेरिला के तेल की बोतल खोली होगी, तो सोंधी खुशबू के बजाय खट्टी और बासी गंध ने नाक में चुभन पैदा की होगी। मेवों या बिस्कुट जैसे खाद्य पदार्थों
किसी बैठक में जब सभी लोग एक ही राय के समर्थन में हाथ उठाते हैं, तो शायद आपने भी मन में संदेह होते हुए चुपके से उनके साथ हाथ उठा दिया हो। किसी खाने की मशहूर दुकान के सामने लंबी कतार
मान लीजिए दो लोगों का वेतन बिल्कुल समान है। एक व्यक्ति स्वस्थ है और बस व मेट्रो से कहीं भी आ-जा सकता है, लेकिन दूसरे को व्हीलचेयर का सहारा लेना पड़ता है, इसलिए रैंप रहित इमारतों या
हज़ारों वर्ष पहले मर चुके पेड़ की लकड़ी का एक टुकड़ा कब काटा गया था, वैज्ञानिक यह कैसे पता लगाते हैं? इसका रहस्य लकड़ी में मौजूद कार्बन परमाणुओं में छिपा है। एक ही कार्बन में थोड़े
सामान्य वितरण सांख्यिकी और गणित के कई क्षेत्रों में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है और दैनिक जीवन के विभिन्न क्षेत्रों में भी इसका व्यापक उपयोग होता है। डेटा विश्लेषण में सामान्य वितरण
खाद्य लेबल एक ऐसा साधन है जो खाद्य पदार्थ चुनते समय हमें बहुत महत्वपूर्ण जानकारी देता है। आधुनिक समाज में स्वस्थ खाद्य पदार्थों का चुनाव हमारे जीवन की गुणवत्ता को काफी प्रभावित कर
इस पाठ में हम प्रबंधन के सिद्धांतों के संदर्भ में कंपनियों और संस्थाओं आदि में इस्तेमाल होने वाली विपणन रणनीतियों के बारे में जानेंगे। विपणन रणनीति को किसी उत्पाद के बाज़ार को समझन
हम जिन स्मार्टफ़ोन का इस्तेमाल करते हैं, उनमें हज़ारों, दसियों हज़ार फ़ाइलें और ऐप होते हैं। यदि फ़ोटो, दस्तावेज़ और संगीत की फ़ाइलें बिना अलग-अलग फ़ोल्डरों के एक ही स्क्रीन पर मिल
आधुनिक समाज में स्वास्थ्य सबसे महत्वपूर्ण संपत्ति बन गया है, और इसी के साथ व्यक्तिगत स्वास्थ्य को बनाए रखने तथा बेहतर बनाने के विभिन्न तरीकों पर ध्यान दिया जा रहा है। विशेष रूप से,
इस बार हम मनोविज्ञान के एक विषय के रूप में मनुष्य द्वारा अनुभव की जाने वाली चिंता के कारकों को संक्षेप में समझेंगे। मनोविज्ञान में चिंता उस नकारात्मक और असहज भावना को कहते हैं, जो
सिनेमा एक दृश्य माध्यम के रूप में दर्शकों पर गहरी छाप छोड़ने की अनूठी क्षमता रखता है। इस क्षमता के केंद्र में 'मीज़-आँ-सेन' है। मीज़-आँ-सेन का अर्थ केवल दृश्य की संरचना तक सीमित नह
सुबह के अखबार के पृष्ठ 1 पर हथेली जितने बड़े अक्षरों में ‘सनसनी’ या ‘हैरतअंगेज़’ जैसे शब्द छपे हों, तो किसी की भी नज़र एक बार उन पर पड़ ही जाती है। खबर पढ़ने पर अक्सर पता चलता है क