इंटरनेट मंचों पर राय बाँटने वाली किसी पोस्ट पर जब सैकड़ों टिप्पणियाँ आने लगती हैं, तो किसी मोड़ पर अक्सर कोई व्यक्ति सामने वाले की तुलना किसी तानाशाह से कर देता है। भले ही बातचीत की शुरुआत अच्छे रेस्तराँ या किसी फ़िल्म से हुई हो। इस प्रवृत्ति को एक वाक्य में व्यक्त करने वाला एक प्रसिद्ध अनुभवजन्य नियम है। यही है ‘गॉडविन का नियम (Godwin's Law)’।
सरल शब्दों में, गॉडविन का नियम इंटरनेट की वह कहावत है जिसके अनुसार ‘ऑनलाइन चर्चा जितनी लंबी चलती है, किसी के द्वारा सामने वाले व्यक्ति या उसके तर्क की तुलना नाज़ियों या हिटलर से किए जाने की संभावना उतनी ही 1 के करीब पहुँचती जाती है।’ इसका नाम अमेरिकी वकील और लेखक माइक गॉडविन (Mike Godwin) के नाम पर रखा गया है। इसका पूरा नाम ‘नाज़ी उपमाओं के बारे में गॉडविन का नियम (Godwin's Law of Nazi Analogies)’ है।
इस लेख में हम क्रम से देखेंगे कि गॉडविन का नियम कैसे बना, उसका आशय क्या है, उससे जुड़ी कौन-सी गलतफ़हमियाँ आम हैं और वह ऑनलाइन बातचीत के लिए क्या सीख देता है।

लंबी बहस के अंत पर रोशनी डालता गॉडविन का नियम
गॉडविन का नियम कहाँ से आया?

यह नियम शुरुआती ऑनलाइन समुदायों में जन्मा था, जब इंटरनेट आज जितना लोकप्रिय नहीं हुआ था।
(1) यूज़नेट के दौर का अवलोकन
गॉडविन ने 1990 में विषयवार चर्चा मंचों के समूह यूज़नेट (Usenet) न्यूज़ग्रुप में पहली बार यह नियम प्रस्तुत किया। उन्होंने गौर किया कि विषय चाहे कोई भी हो, चर्चा लंबी चलने पर नाज़ियों और हिटलर से तुलना लगभग हर बार सामने आ जाती है।
(2) जानबूझकर फैलाया गया प्रयोग
गॉडविन ने बताया कि उन्होंने इस वाक्य को एक तरह के मीम (meme) प्रयोग के रूप में बनाया था। उनका मानना था कि यूँ ही नाज़ियों से तुलना कर देना होलोकॉस्ट की गंभीरता को तुच्छ बना देता है। उन्हें आशा थी कि इसे एक नियम के रूप में फैलाने से ऐसी तुलनाएँ कम होंगी।
(3) माइक गॉडविन कौन हैं?
गॉडविन ने डिजिटल अधिकारों के संगठन इलेक्ट्रॉनिक फ्रंटियर फ़ाउंडेशन (Electronic Frontier Foundation) के पहले पूर्णकालिक वकील के रूप में काम किया। वे 2007 से 2010 तक विकिमीडिया फ़ाउंडेशन के कानूनी प्रमुख भी रहे। उन्होंने लंबे समय तक ऑनलाइन अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता से जुड़े मुद्दों पर काम किया है।
शुरुआत में केवल यूज़नेट की चर्चाओं में इस्तेमाल होने वाली यह बात बाद में इंटरनेट मंचों, चैट रूम और सोशल मीडिया की टिप्पणियों के साथ-साथ भाषणों और लेखों में दी गई अतिरंजित उपमाओं के लिए भी इस्तेमाल होने लगी।
यह नियम क्या कहता है और क्या नहीं कहता

गॉडविन का नियम सुनने में गणित के सूत्र जैसा लगता है, लेकिन वास्तव में यह अवलोकन और व्यंग्य से भरा एक कथन है।
(1) संभावना की अभिव्यक्ति
इस नियम का सार यह है कि बातचीत जितनी लंबी चलती है, ऐसी उपमा सामने आने की संभावना उतनी ही बढ़ती जाती है। यह इस बात पर चुटीली टिप्पणी है कि बातचीत पर्याप्त लंबी चले तो कोई भी उपमा अंततः कम-से-कम एक बार सामने आ ही जाती है।
(2) तार्किक भ्रांति से संबंध
इस नियम का ज़िक्र अक्सर ‘हिटलर के सहारे तर्क (Reductio ad Hitlerum)’ के साथ होता है, जिसमें सामने वाले के तर्क को हिटलर से जोड़कर नीचा दिखाया जाता है। राजनीतिक दार्शनिक लियो स्ट्रॉस (Leo Strauss) ने 1953 में यह नाम दिया था। यह उस भ्रांति को दर्शाता है जिसमें तर्क की विषयवस्तु के बजाय केवल किसी संबंध के आधार पर सामने वाले पर हमला किया जाता है।
(3) शब्दकोश में शामिल कहावत
गॉडविन का नियम इतना प्रचलित हो गया कि 2012 में ऑक्सफ़र्ड इंग्लिश डिक्शनरी (Oxford English Dictionary) के संस्करण 3 में इसे एक प्रविष्टि के रूप में शामिल किया गया।
इसलिए यह नियम केवल किसी खास विषय तक सीमित नहीं है। यह दिखाता है कि राजनीति, खेल, गेम या खाना पकाने जैसे बिल्कुल अलग विषयों पर चर्चा में भी बातचीत लंबी खिंचने और भावनाएँ बढ़ने पर अतिवादी उपमाएँ आसानी से सामने आ सकती हैं।
आम गलतफ़हमियाँ और वास्तविक शोध

यह नियम जितना व्यापक रूप से फैला है, उतनी ही बार इसका इस्तेमाल मूल अर्थ से अलग ढंग से भी होता है।
- ज़िक्र करने वाला हारता है (Loser Rule): कई मंचों पर यह परंपरा है कि नाज़ियों से तुलना होते ही बहस समाप्त हो जाती है और वह तुलना करने वाला पक्ष हार जाता है। इस परंपरा को कभी-कभी गॉडविन का नियम भी कहा जाता है, लेकिन स्वयं गॉडविन ने अपने नियम को बहस समाप्त करने वाले निर्णय-नियम के रूप में इस्तेमाल करना स्वीकार नहीं किया।
- हर तुलना पर प्रतिबंध (Total Ban): गॉडविन ने कहा कि यदि पर्याप्त विचार के बाद कोई तुलना उचित लगे, तो उसे किया जा सकता है। यानी यह नियम तुलना को ही रोकने के लिए नहीं, बल्कि बिना सोचे-समझे की गई तुलनाओं पर दोबारा विचार कराने का एक उपाय है।
- क्या वास्तव में हमेशा ऐसा होता है? (Reality Check): 2021 में अमेरिका के हार्वर्ड विश्वविद्यालय के शोधकर्ताओं ने ऑनलाइन समुदाय रेडिट (Reddit) की बातचीत का विश्लेषण किया। उनके निष्कर्ष के अनुसार, नाज़ियों से तुलना इतनी बार सामने नहीं आई कि वह सांख्यिकीय रूप से सार्थक हो।
इस तरह गॉडविन का नियम सटीक भविष्यवाणी से अधिक ऑनलाइन बातचीत की आदतों को दिखाने वाला दर्पण है।
ऑनलाइन बातचीत के लिए सीख

गॉडविन का नियम बहस समाप्त करने का कोई मंत्र नहीं है; यह शब्द चुनने के हमारे रवैये की बात करता है।
(1) अतिरंजित उपमाओं से सावधान रहें
भावनाएँ तीव्र होने पर सामने वाले की तुलना सबसे बुरी हस्ती से करने का मन हो सकता है, लेकिन ऐसी उपमाएँ बातचीत रोक देती हैं और इतिहास की वास्तविक त्रासदियों की गंभीरता कम करती हैं।
(2) उपमा से पहले प्रमाण रखें
सामने वाले की किसी से तुलना करने से पहले यदि ठोस प्रमाणों के साथ स्पष्ट करें कि क्या और किस तरह मिलता-जुलता है, तो वही आलोचना कहीं अधिक प्रभावशाली हो जाती है।
(3) इसे बातचीत की शुरुआत बनाएँ
गॉडविन चाहते थे कि इस नियम का इस्तेमाल बातचीत समाप्त करने के बजाय उसे शुरू करने के लिए हो। जब कोई उपमा सामने आए, तो उसे मिलकर यह जाँचने का अवसर बनाया जा सकता है कि तुलना वास्तव में उचित है या नहीं।
अंततः यह नियम पूछता है, ‘क्या यह तुलना वास्तव में सही है?’ पहले स्वयं से यह प्रश्न पूछने की आदत भर से ऑनलाइन बातचीत का माहौल बहुत बदल सकता है।
गॉडविन का नियम दिखाता है कि स्क्रीन के उस पार चलने वाली बहस कितनी आसानी से अतिवादी दिशा में जा सकती है। एक वाक्य की यह कहावत कई दशकों तक शायद इसीलिए टिकी रही है कि हम ऐसे मिलते-जुलते दृश्य बार-बार देखते आए हैं।
कोई तीखी उपमा देने से पहले उसकी गंभीरता पर एक बार और विचार करना ही स्वस्थ ऑनलाइन चर्चा की ओर पहला कदम है।